चिनारों का शहर होगा
उस बीच कहीं पर छोटा सा
नारंगी अपना घर होगा
रात और दिन से बेफिक्र वहीं
बहारों से लिपटा हर पहर होगा
चिनारों का शहर होगा।।
वहीं पास में बहता इक दरिया
हम जिसके किनारे बैठेंगे
तेरे गोद में हाथों के नीचे
पड़ा हुआ मेरा सर होगा।
चिनारों का शहर होगा।।
तेरी गोद मैं लेटे-लेटे जब
तेरे गालों पे उंगली फिराउँगा
यह सोच सिहर मैं जाता हूँ
क्या रूमानी मंजर होगा ।
चिनारों का शहर होगा ।।
मैं इत्रफरोश सा बैठूंगा
तेरे ऐहतराम की चाहत में
जब आयेगी तू फिर तो बस
तुझ से माहौल वो तर होगा ।
चिनारों का शहर होगा।।
उस बीच कहीं पर छोटा सा
नारंगी अपना घर होगा
रात और दिन से बेफिक्र वहीं
बहारों से लिपटा हर पहर होगा
चिनारों का शहर होगा।।
वहीं पास में बहता इक दरिया
हम जिसके किनारे बैठेंगे
तेरे गोद में हाथों के नीचे
पड़ा हुआ मेरा सर होगा।
चिनारों का शहर होगा।।
तेरी गोद मैं लेटे-लेटे जब
तेरे गालों पे उंगली फिराउँगा
यह सोच सिहर मैं जाता हूँ
क्या रूमानी मंजर होगा ।
चिनारों का शहर होगा ।।
मैं इत्रफरोश सा बैठूंगा
तेरे ऐहतराम की चाहत में
जब आयेगी तू फिर तो बस
तुझ से माहौल वो तर होगा ।
चिनारों का शहर होगा।।
No comments:
Post a Comment