क्यों मैं ये समझ ना पाता हूँ
हर इक पल कुछ ढ़ल जाता हूँ
मानवता के अंगारों पर चलने पहले आ जाता हूँ
हर इक पल कुछ ढ़ल जाता हूँ
तेरे मेरे के नारों में
मैं सबक नारा लगाता हूँ
सच्चे झूठों की बहसों में क्यों
झूठा कहलाया जाता हूँ ।।
हर इक पल.......
जो साथ चले आये अब तक
अब भी उनको उकसाता हूँ
मत करना आत्मसमर्पण तुम
मैं पक्की बात बताता हूँ।।
हर इक पल मैं कुछ.........
हर इक पल कुछ ढ़ल जाता हूँ
मानवता के अंगारों पर चलने पहले आ जाता हूँ
हर इक पल कुछ ढ़ल जाता हूँ
तेरे मेरे के नारों में
मैं सबक नारा लगाता हूँ
सच्चे झूठों की बहसों में क्यों
झूठा कहलाया जाता हूँ ।।
हर इक पल.......
जो साथ चले आये अब तक
अब भी उनको उकसाता हूँ
मत करना आत्मसमर्पण तुम
मैं पक्की बात बताता हूँ।।
हर इक पल मैं कुछ.........
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