अपने पैरों पे होके खड़ा
जब तक ना सब को दिखायेगा
बिन पात्र दिखे सबके सम्मुख
तू ऐसे ठोकर खायेगा ।।
अपने पैरों.........
अब मदद मांगना छोड़ के तू खुद में ऐसा परिवर्तन कर कि जाने तुझको लोग सभी वरना ऐसे पछतायेगा ।। अपने पैरों..........
सब उगते सूरज से हरदम रोशनी चुराते रहते हैं अपने अन्दर कुछ जला दे वो जिससे सूरज ढ़क जायेगा ।। अपने पैरों पे होके खड़ा जब तक ना सबका दिखायेगा।।
सब वक्त के साथ बदलते हैं तू किसको अपना बतायेगा गर चिन्ता इसकी छोड़ दे तू तो पक्का कुछ कर जायेगा ।। अपने पैरों.......... जब तक ना सबको दिखायेगा।।
अब मदद मांगना छोड़ के तू खुद में ऐसा परिवर्तन कर कि जाने तुझको लोग सभी वरना ऐसे पछतायेगा ।। अपने पैरों..........
सब उगते सूरज से हरदम रोशनी चुराते रहते हैं अपने अन्दर कुछ जला दे वो जिससे सूरज ढ़क जायेगा ।। अपने पैरों पे होके खड़ा जब तक ना सबका दिखायेगा।।
सब वक्त के साथ बदलते हैं तू किसको अपना बतायेगा गर चिन्ता इसकी छोड़ दे तू तो पक्का कुछ कर जायेगा ।। अपने पैरों.......... जब तक ना सबको दिखायेगा।।
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