Sunday, December 29, 2024

ओ GEN - G , Alpha, Beta सुनो !

 ओ GEN - G , Alpha, Beta सुनो  !

तुमसे ये मिलेनियल कुछ कहना चाहता है 

जब हम तुम्हारी उम्र के थे तो उन्होंने हमारे समय में एक मस्जिद तोड़ी थी 

अब फिर से वो एक अगली मस्जिद तोड़ने की फ़िराक़ में हैं 

तुम उनके झाँसे में आकर उनका साथ देने मत जाना 

हम गर्वातिरेक में उस मस्जिद की एक एक ईंट उठाकर अपने-अपने घर ले आये थे 

अयोध्या में हम ईंटे बीन रहे थे और पश्चिम वाले इंटरनेट ला चुके थे और गूगल - सर्च इंजन बनाने में लगे हुए थे

इधर हमने 2002 में गोधरा और गुजरात जलाया 

उधर 2004 में गूगल ने G-mail लांच कर दिया और उसी वर्ष  फ़ेसबुक भी आया 

और फ़ेसबुक लाने वाला एक 20 साल का हमारे जैसा नौजवान था

ये सब करके हम जैसे ही दुनिया में हो रही प्रगति से रूबरू हो ही रहे थे कि 

तब तक एक शिकारी नेता इस देश की नासूर हो चुकी समस्या भ्रष्टाचार के ख़ात्मे के वादे के साथ 

2012 में हमसे आंदोलन करवाया  

2-3 साल हमारे उसमें गये 

हम उसके झाँसे से उबर ही रहे थे कि 2014 में 

एक नेता तपस्वी के लबादे में आया हमारी पीड़ा दूर करने के अनगिनत वादों के साथ 

वो समझ गया कि हम मिलेनियल अपने स्व की पहचान के संकट से जूझ रहें हैं 

उसने तुरत हमें विश्वगुरु बनने का ढोंग समझाया 

हम काफ़ी खुश हुए क्योंकि हमारे स्व को एक फ़ौरी लेकिन खोखली पहचान उसने दे दी 

उसके बाद भी हमारी उमर खपती रही और कुछ बदलाव नहीं आया 

तो हमने अपने पुरुषार्थ से IT में लामें-नेरे प्रगति की 

भले ही वो देश के दक्षिणी हिस्से तक ही सीमित रही 

हम आगे बढ़ ही रहे थे कि 2019 में 

फिर से वो मस्जिद का जिन्न बाहर लाया 

इस बार मंदिर बनाकर उसने हमें सभ्यताई गौरव का झुनझुना पकड़ाया 

हम उसकी बातों से फिर से ओत-प्रोत थे 

वो सिलिकन वैली में जाकर सभी भारतवंशियों को हमारे देश बुलाया 

और हमें बताया कि देखो तुम्हारा भाई विश्वगुरु है 

हम फिर से बेहद खुश थे बग़ैर ये दिमाग़ लगाये कि सब अमेरिकी नागरिक हैं 

जब तक हम ये सब हम टटोल पाते तब तक पश्चिम Chat-जीपीटी लेकर आ गया 

तुम्हें यह बताना था इन 35-40 सालों में हुए क्रांतिकारी अविष्कारों में हमारी कहीं कोई हिस्सेदारी नहीं है 

यहाँ मुझे अपनी पहचान का संकट दिख रहा 

यहाँ मेरा आत्म गौरव लहुलुहान है 

मेरी उम्र खप चुकी है । यही सब बताना था । 

ठीक हमारे समय की तरह फिर से उसने एक दूसरी मस्जिद पर तुम्हारे बलबूते दावा ठोका है । मत जाना ।

तुम्हें मेरी बात झूठी लगे तो जाओ पढ़ो जॉर्ज ओर्वेल , कामू , काफ़्का और फूको को 

मुक्तिबोध , धूमिल , नागार्जुन , अज्ञेय और यश मालवीय को  ॥

Chat-Gpt - 4 आ चुका है ।


@ शुभांकर

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