Thursday, December 15, 2016

मैं ओट ले लेता हूँ ( I take cushion )

जब कभी झूठ बोलता हूँ तो
औचित्यपूर्णता की ओट ले लेता हूँ
जब अपना हित साधता हूँ
तो बुद्धिजीविता की ओट ले लेता हूँ
दूसरों को जो करने देने से रोकता हूँ
फिर अपने वही शुरू करता हूँ
जब देश बनाता हूँ
तो अपने नागरिकों की ओट ले लेता हूं।
जब मेरा षडयन्त्र और चालें पकड़ी जाती हैं तो
मैं मैकियाविली, चाणक्य और हाॅब्स की ओट ले लेता हूं
मानवता का हनन करता हूं तो
राष्ट्ररक्षा की ओट ले लेता हूं
किसी की हत्या करता हूं तो
आत्म रक्षा की ओट ले लेता हूं
हर समय संदर्भ और परिस्थितियां बदलती रहती हैं
उसी तरह ओट लेने के मेरे तरीके भी बदलते रहते हैं।।
मैं दूसरों को हतोत्साहित भी करता हूं, उत्साहित भी करता हूं
लालायित भी करवाता हूं
अश्लील बनता हूं, अश्लीलता फैलाता हूं
फिर फैशन की ओट ले लेता हूं
दकियानूसी विचार फैलाता हूं
फिर संस्कृति और परम्परा की ओट ले लेता हूं
जब अक्षम्य गलतियां करता हूं तो
दुनियावी प्रायश्चितता की ओट ले लेता हूं
दलितों ,दमितों , शोषितों को बेघर करता हूं तो
बाजार और विकास की ओट ले लेता हूं
अपने अनुकूल सामाजिक व्यवस्था बनाता हूं
और यथास्थिति की ओट ले लेता हूं
दोस्तों इसी तरह ओट लेकर मैं जीतता रहता हूं
जीवन के इस रहस्य को मैं अपनी अगली पीढ़ी में डालता हूँ
और अगर वह असहमति जताते हैं तो
आपने उम्रदराज अनुभवों की ओट ले लेता हूं।
मुझे पाखण्डी कहलाने का खतरा है
इसीलिए मैने कई तरह की ओटों को ईजाद किया है।

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