Sunday, December 29, 2024

तुम्हारे साथ का बल

तुम मेरे साहस का वह स्रोत हो जिसके दम पर मैं जीवन की किसी भी परीक्षा में बैठने की विवशता से ख़ुद को मुक्त कर सकता हूँ 

ऐसा बचपन से मैं माँ के आश्वासन के बल पर करता आया हूँ 

दुनियावी परीक्षा तंत्र  मुझे डिज़र्व नहीं करता 

इसलिए उसमें शामिल ना होकर मैंने अपनी साख बचा ली है 

अभी हाल हाल में मुझे भान हुआ कि अपने भीतर के परीक्षार्थी का मैं स्वयं परीक्षक रहा ताउम्र 

मुझे माँ ईश्वर से ज़्यादा हिम्मती लगती रहीं हैं

हालाँकि बक़ौल माँ , ये मेरा फ़ितूर है 

लेकिन तुमसे मिलने पर मुझे ईश्वर को मानने पर बाध्य होना पड़ा है

यही वह विषय था जिसको लेकर माँ से मेरी हमेशा अनबन रही 

पर माँ शायद हमेशा से सही थीं , सही हैं , पता नहीं ॥

03: 30 AM , 30-12-2024

~ शुभांकर

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