तुम विश्वगुरु बनने का आडंबर शुरू करो
और पुरुषार्थ का वमन कर चुके नौनिहालों का एक आक्रोशित समूह तैयार करो
मैं चलता हूँ जरा पता करता हूँ आज हमारे देश में प्लास्टिक का उत्पादन कितना बढ़ा ?
अख़बार में आँकड़ा निकालता हूँ कि भारत सहित दुनिया में प्रति परिवार कार्बन उत्सर्जन कितना बढ़ा ?
अपने देश की राजधानी दिल्ली में बदतर होते वायु प्रदूषण से देशवासियों की कम होती औसत आयु पर मुझे एक लेख भी लिखना है
और अपने देश सहित दुनिया में लिखे जा रहे साहित्यों में जलवायु परिवर्तन पर व्यक्त चिंताओं से अपने को रूबरू भी करवाना है
दुनिया के ठेकेदारों ने पृथ्वी पर उपलब्ध स्थल भूभाग के कितने प्रतिशत हथिया ली है ज़मीन ? अभी मुद्दा ये भी है
गरीबी और भुखमरी ठीक-ठीक नापने का कोई आसान सा फार्मूला आज तक क्यों नहीं बन पाया अपने देश में ?
मुझे पढ़ने हैं अभी उस पर कई सारे शोध-पत्र
इसके अतिरिक्त मुझे अपने सीखने के लिए पता करना है अभी आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंश की कोई वर्कशॉप
जिसमें ज़ाहिर है एक्सपर्ट होगा कोई विदेशी प्रोफ़ेसर सच में विश्वगुरु के माफ़िक
बिना अपनी गुरुता के गर्वबोध में पगा हुआ
वर्कशॉप के बाद ले जाएगा उन सभी प्रतिभाओं को अपने देश और फिर से कर देगा तुम्हें विवश और विकल एक आक्रोशित झुंड बनाने के लिए
और फिर तुम्हारे पास अपनी खोखली साख बचाने को रह जाएगा विश्वगुरु बनने का आडंबर ॥
[2:28 am, 30/12/2024]
~ शुभांकर
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