Thursday, October 20, 2016

सपने तू चला जा

सपने तू चला जा अब मैं तेरा पीछा नहीं करूंगा

घर पे माँ अकेली है मेरी
अब उसके साथ रहूँगा
उसकी गोदी में सर रखकर
अब जोर-जोर रोउँगां
सपने तू चला जा अब मैं तेरा पीछा नहीं करूँगां।।

पापा के आॅफिस में जाकर
अब उनसे गले मिलूँगा
अपनी सारी नादानी की
उनसे माफी मागूंगा
सपने तू चला जा अब मैं तेरा पीछा नहीं करूंगा
तेरा पीछा करते-करते
मेरे कितने अपने छूटे
चुन चुन के उन रिश्तों के
अब मैं सारे कर्ज भरूंगा
सपने तू चला जा अब मैं तेरा पीछा नहीं करूंगा।।

झूठे सारे किस्से हैं
पर ढ़ब से बनाये गये हैं
बुनियाद खोखली हो जिसकी
मैं वो किस्सा नहीं बनूंगा
सपने तू चला जा अब मैं तेरा पीछा नहीं करूंगा
घर में माँ अकेली है मेरी
मैं उसके साथ रहूंगा।।

जो भी तुझसे शिकवे थे
अब सब वापस ले लूंगा
उनको इक कलश में रखकर
गंगा में विसर्जित करूंगा ।।
सपने तू चला जा अब मैं तेरा पीछा नहीं करूंगा

तुझको पाने को अब तक
कितनी रातें जागी हैं
अब पीछा छोड़ के तेरा
मैं चैन की नींद सोउंगा
तू नहीं मिला तो क्या है ?
फिर भी बिंदास जिऊंगा
सपने तू चला जा अब मैं तेरा पीछा नहीं करूंगा।।

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