Wednesday, October 19, 2016

मेरा प्यारा यार चुप

एक चुप हजार चुप
वह था बार-बार चुप
हर तरह की हलचलों पे
मेरा प्यारा यार चुप
एक चुप...........


आत्मा से जल रहा था
दर्द से पिघल रहा था
मौत पास आ गयी
पता उसे ये चल रहा था
साथ में खड़ा अधेरा
उसको लीलता था घुप
एक चुप हजार चुप
वह था बार-बार चुप


लक्ष्य के मुहाने पर
पहुँच चुका था वो तुरूप
आत्मा ने बोला तब
फायदा नहीं है अब कुछ
एक चुप......
वह था बार-बार चुप ।।

No comments:

Post a Comment