" सब कुछ पहले जैसा क्यों नहीं होता"
मूल की तलाश में रुचि थी उसे
वह हिरन था
पर वह उसकी मरीचिका नहीं थी
वह साबुत शरीर थी
औऱ उसमें समायी थी
मूल की तलाश मरीचिका जैसी थी या नहीं
वह नहीं जानता था
लेकिन वह उसको जानता भी था समझता भी था
मूल की तलाश की जद्दोजहद में
एक दिन अलग हो गया वो मूल से
अगले दिन अखबारनवीसों ने छापा
कि जंगल में शिकारियों ने एक हिरन का शिकार किया
वहीं हिरन की लाश के पास एक पेड़ जड़ों से उखड़ गया
उस पेड़ के बाशिंदे पंछियों ने बताया कि
हिरन का संसार ये पेड़ था ॥
@Shubhankar
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