रोज़ की तरह उसने दरवाज़ा खोला
वह आवारा कुत्ता उसके सामने था
उसने हाथ से रोटी फेकने के लिये हाथ बढ़ाया
और अचानक रुक गया
उसने कुत्ते की आँखों में देखा
फिर अचानक कोयल की आवाज़ आयी
उसने मुंडेर पर कोयल की आँखों में देखा
फिर हवा चली उसने पेड़ की आँखों में देखा
तभी सारंगी लिए एक सूफ़ी ने दरवाज़े पर दस्तक दी
उसने सूफ़ी की आँखों में देखा
सबकी आँखों में देखकर वो बेचैन हो गया
क्योंकि उन सबकी आँखों में जो था , बस इसकी आँखों में नहीं था
उसने सूफ़ी से उसकी आँखों की क़ीमत पूछी
सूफ़ी ने मुस्कुराकर सारंगी उठाई और चल पड़ा
कुत्ता अपनी आँखें लिए आगे आगे चला
उसके आगे कोयल चली
सबसे आगे पेड़ चला था अपनी आँखों के साथ ॥
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