मेरी निष्ठाओं का प्रदर्शन या अभिव्यक्तिकरण मेरे स्नेहीजनों के समक्ष बरबस ही हुआ होगा
ऐसा मुझे जान पड़ता है
तभी तो कभी किसी ने मुझे
मेरी निष्ठा के संदर्भ में सवाल नहीं किया
जीवन यात्रा में जो कथित निष्ठावान मिले
वो कालांतर में धर्मभीरु निकले
जो अनिष्ठावान मिले
वो कालांतर में अराजक निकले
कौन क्या निकला ?
ये मेरी चिंता का विषय नहीं है
चिंता मुझे इस बात की है
जितनों मेरी निष्ठा पर प्रश्न किया उनमें से
कोई निष्ठावान नहीं निकला ॥
अंततः ना मैं धर्मभीरू हूँ
ना ही अराजक
तो आप विज्ञ जन मार्गदर्शन करें
जिससे मैं दुनिया को समझा सकूँ कि
वह कौन से आदर्श , मूल्य और नियम थे जिनके प्रति मैं जीवनपर्यंत निष्ठावान रहा। ॥
22 जुलाई 2022
समय -5:09 पूर्वाह्न
स्थान - हल्द्वानी
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